बिहार, जो भारत के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण राज्य है, में अनुसूचित जनजातियों (ST) की एक विस्तृत और विविध जातीय संरचना पाई जाती है। राज्य में कई जातियाँ हैं जो आदिवासी समुदायों से संबंधित हैं और इनकी विशेष सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक पहचान है। बिहार की अनुसूचित जनजातियाँ राज्य के विभिन्न हिस्सों में बसी हुई हैं, और इनकी जीवनशैली, परंपराएँ और रीति-रिवाज अनूठे हैं।
बिहार में अनुसूचित जनजाति (ST) की परिभाषा
अनुसूचित जनजातियाँ (ST) वे समुदाय होते हैं जिन्हें भारतीय संविधान की अनुसूची 5 में सूचीबद्ध किया गया है। इन जातियों को विशेष अधिकार दिए गए हैं ताकि वे समाज में समानता और विकास की ओर अग्रसर हो सकें। बिहार में अनुसूचित जनजातियों की संख्या अपेक्षाकृत कम है, लेकिन इनकी सांस्कृतिक और सामाजिक उपस्थिति महत्वपूर्ण है।
बिहार में प्रमुख अनुसूचित जनजातियाँ
-
Santhal (संथाल): संथाल बिहार की एक प्रमुख आदिवासी जाति है। ये मुख्य रूप से झारखंड और पश्चिम बंगाल में पाए जाते हैं, लेकिन बिहार में भी इनकी बड़ी संख्या है। संथालों की संस्कृति और उनके पारंपरिक नृत्य, संगीत और लोककला बहुत ही लोकप्रिय हैं। संथाल समुदाय मुख्य रूप से कृषि और जंगल आधारित जीवनयापन करते हैं।
-
Munda (मुंडा): मुंडा जाति बिहार के आदिवासी समुदायों में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। मुंडा समुदाय का मुख्य व्यवसाय कृषि है, और यह अपने पारंपरिक रीति-रिवाजों में विश्वास रखते हैं। इनकी संस्कृति में प्रमुख स्थान पर द्रव्य, नृत्य और शिकार की गतिविधियाँ होती हैं।
-
Oraon (ओरांव): ओरांव आदिवासी समुदाय बिहार और झारखंड के जंगलों में निवास करते हैं। यह समुदाय पारंपरिक रूप से कृषि कार्यों में संलग्न होता है। ओरांव समुदाय के लोग अपने पारंपरिक धार्मिक विश्वासों और रीति-रिवाजों का पालन करते हैं।
-
Kharia (खरिया): खरिया जाति बिहार के आदिवासी समूहों में एक महत्वपूर्ण नाम है। इनकी मुख्य गतिविधि कृषि और जंगलों से संबंधित है। खरिया जाति के लोग अक्सर समूहों में रहते हैं और इनके रीति-रिवाज और सामाजिक संरचना पारंपरिक होती है।
-
Gond (गोंड): गोंड आदिवासी समुदाय मुख्य रूप से मध्य भारत और छत्तीसगढ़ से संबंधित है, लेकिन बिहार में भी यह समुदाय पाया जाता है। गोंड लोग जंगलों में बसा करते हैं और मुख्य रूप से शिकार और कृषि कार्यों में लगे रहते हैं। इनकी संस्कृति में उनकी आदिवासी नृत्य और संगीत का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है।
-
Banjara (बंजारा): बंजारा जाति भी बिहार के आदिवासी समुदायों में शामिल है। यह जाति मुख्य रूप से घुमंतू जीवन जीने वाली जाति है और पशुपालन का कार्य करती है। बंजारा समुदाय के लोग अक्सर अपने झुंडों के साथ यात्रा करते हैं और विभिन्न क्षेत्रों में व्यापार करते हैं।
Here is the complete list of Scheduled Tribes (ST) in Bihar
English | Hindi |
---|---|
1. Asur | 1. असुर |
2. Baiga | 2. बैगा |
3. Banjara | 3. बंजारा |
4. Bathudi | 4. बाथुड़ी |
5. Bedia | 5. बेड़िया |
6. Bhumij | 6. भूमिज |
7. Binjhia | 7. बिनझिया |
8. Birhor | 8. बिरहोर |
9. Birjia | 9. बिरजिया |
10. Chero | 10. चेड़ों |
11. Chik Baraik | 11. चिक बरइक |
12. Gond | 12. गोंड |
13. Gorait | 13. गोरेत |
14. Ho | 14. हो |
15. Karmali | 15. कर्माली |
16. Kharia | 16. खरिया |
17. Kharwar | 17. खरवार |
18. Kondh | 18. कोंध |
19. Kisan | 19. किसान |
20. Kora | 20. कोरा |
21. Korwa | 21. कोर्वा |
22. Lohara (Lohra) | 22. लोहरा (लोहरा) |
23. Mahli | 23. महली |
24. Mal Pahariya | 24. माल पहाड़िया |
25. Munda | 25. मुंडा |
26. Oraon | 26. ओरांव |
27. Parhaiya | 27. परहैया |
28. Santhal | 28. संथाल |
29. Sauria Paharia | 29. सौरिया पहाड़िया |
30. Savar | 30. सावार |
अनुसूचित जनजातियों के अधिकार और योजनाएँ
भारत सरकार और राज्य सरकारें अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के लिए कई योजनाएँ और नीतियाँ लागू करती हैं। बिहार सरकार ने इन समुदायों के लिए विभिन्न प्रकार की सामाजिक और आर्थिक योजनाएँ बनाई हैं, जैसे कि शिक्षा, स्वास्थ्य, भूमि वितरण, और रोजगार के अवसर।
शिक्षा के अधिकार: बिहार सरकार ने अनुसूचित जनजाति के बच्चों के लिए विशेष छात्रवृत्तियाँ और छात्रावासों की व्यवस्था की है, ताकि वे बेहतर शिक्षा प्राप्त कर सकें।
स्वास्थ्य सेवाएँ: आदिवासी समुदायों के लिए सरकारी अस्पतालों में विशेष स्वास्थ्य योजनाएँ और सुविधाएँ उपलब्ध हैं, ताकि इन समुदायों का स्वास्थ्य बेहतर हो सके।
आवास और भूमि अधिकार: बिहार में अनुसूचित जनजातियों के लिए सरकारी योजनाओं के तहत भूमि आवंटन और आवास प्रदान किया जाता है।
चुनौतियाँ और समाधान
हालाँकि बिहार में अनुसूचित जनजातियों के लिए कई योजनाएँ बनाई गई हैं, लेकिन फिर भी इस समुदाय को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है:
- शिक्षा की कमी: आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा की स्थिति अभी भी संतोषजनक नहीं है।
- आर्थिक स्थिति: अधिकांश आदिवासी समुदाय गरीबी के शिकार हैं और उनका जीवन यापन कृषि पर निर्भर है।
- सामाजिक भेदभाव: आदिवासी समुदायों को समाज में भेदभाव का सामना करना पड़ता है, जिससे उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति प्रभावित होती है।
इन समस्याओं का समाधान सरकारी योजनाओं, बेहतर शिक्षा, और सामाजिक जागरूकता से संभव हो सकता है।
निष्कर्ष
बिहार में अनुसूचित जनजातियाँ महत्वपूर्ण सामाजिक समूह हैं, जिनकी सांस्कृतिक धरोहर, परंपराएँ और रीति-रिवाजों को संरक्षित किया जाना चाहिए। बिहार सरकार और केंद्र सरकार ने इन समुदायों के कल्याण के लिए कई योजनाएँ बनाई हैं, लेकिन इनकी समस्याओं को हल करने के लिए लगातार प्रयासों की आवश्यकता है। इन समुदायों को मुख्यधारा में लाने के लिए समग्र विकास और सामाजिक न्याय की दिशा में काम करना बेहद महत्वपूर्ण है।